Category: Bollywood Updates

31 जुलाई को रिलीज होगी जबर्दस्त सस्पैंस थ्रिलर ‘My Client’s Wife’

31 जुलाई को रिलीज होगी जबर्दस्त सस्पैंस थ्रिलर ‘माई क्लाईंट्स वाइफ’- दीपक दुआ कोरोना संकट और लॉकडाउन ने थिएटरों को भले ही बंद कर दिया हो लेकिन नई फिल्मों की रिलीज पर कोई रोक नहीं लग पाई है। ओ.टी.टी. के विभिन्न मंचों पर अब ऐसी फिल्में आ रही हैं जो असल में सिनेमाघरों के लिए […]

Good Newwz Movie Review by Deepak Dua

रिव्यू-मुबारक हो, ‘गुड न्यूज़’ है -दीपक दुआ… वरुण बत्रा-दीप्ति बत्रा। पति-पत्नी। बरसों की कोशिश के बाद भी ये दोनों मां-बाप नहीं बन पा रहे थे तो ये लोग पहुंचे डॉ. जोशी के आई.वी.एफ. क्लिनिक में ताकि कृत्रिम गर्भाधान करवा सकें। लेकिन एक गड़बड़ हो गई। वहां चंडीगढ़ से हनी बत्रा-मोनिका बत्रा भी इसी काम से […]

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

रिव्यू-‘दबंग 3’-न सीक्वेल, न प्रीक्वेल, बस चल-चला-चल Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua -दीपक दुआ… (Featured in IMDb Critics Reviews) इस फिल्म की कहानी सलमान खान ने लिखी है। और कहानी कुछ यूं है कि…! अच्छा अब आपको ‘दबंग’ जैसे नाम वाली फिल्म में सलमान खान जैसे ‘लेखक’ की लिखी कहानी भी जाननी है? कितने भोले हैं न आप। सच तो यह है कि आप ही जैसे लोगों के दम पर तो हिन्दी फिल्में कमा-खा रही हैं। वरना कायदे की फिल्में धरी न रह जातीं और दबंगई दिखाने वाली फिल्में एक दिन में करोड़ों न बटोर ले जातीं। इस बार चुलबुल पांडेय टुंडला शहर के पापड़गंज थाने में तैनात हैं। जैसा कॉमिक्स-नुमा इस थाने का नाम है, वैसे ही सारे किरदार और उनकी हरकतें हैं इस फिल्म में। बेवजह ठूंसे गए इन किरदारों और उनकी इन बेसिर-पैर की हरकतों से ही तो रंगत आती है इस किस्म की फिल्मों में। इस बार चुलबुल पांडेय की ज़िंदगी में बहुत पीछे तक गई है कहानी। जब चुलबुल असल में धाकड़ चंद पांडेय था। जब उसकी ज़िंदगी में खुशी नाम की लड़की आई थी और उसी की वजह से उसकी भिड़ंत बाली सिंह से हुई थी। यानी चाहें तो आप इस फिल्म को ‘दबंग’ का सीक्वेल भी कह सकते हैं और चाहें तो प्रीक्वेल भी। लेकिन सच तो यह है कि ऐसी फिल्मों के न सीक्वेल होते हैं, न प्रीक्वेल। बस चल-चला-चल होते हैं। जब तक आप चला रहे हैं, ये चल रहे हैं। कहानी ‘भाई’ की है लेकिन स्क्रिप्ट पर तीन लोगों ने हाथ आजमाया है। तो, जैसी इसकी कहानी है, यूं समझ लीजिए कि स्क्रिप्ट भी वैसी ही है। कहीं से कुछ भी शुरू हो जाता है और चुलबुल पांडेय आकर सब सही कर देता है। दहलाने के लिए वही ज़बर्दस्ती की मारधाड़, हंसाने के लिए वही बेसिर-पैर की फूहड़ बातें और दिखाने के लिए वही पिलपिला रोमांस। रही संवादों की बात तो उन्हें भी दो लोगों ने बड़ी ‘मेहनत’ से लिखा है। ‘चमचे हो, अब यह बताओ कि टी-स्पून हो या टेबल-स्पून’ जैसे संवाद इस किस्म की फिल्मों को भरपूर शोभा देते हैं। सलमान खान इस किरदार में जैसी एक्टिंग करते आए हैं, वैसी ही इस बार भी की है। सोनाक्षी भी वैसी ही रहीं। नई लड़की सई मांजरेकर को कुछ कायदे के सीन मिलते तो वह […]

Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga Movie Review by Deepak Dua

Ek Ladki Ko Dekha Toh Aisa Laga Movie Review  by Deepak Dua   रिव्यू-‘एक लड़की…’ को दिमाग से नहीं, दिल से देखिए दीपक दुआ…  किसी लड़की को देख कर मन में खिलते गुलाब, शायर के ख्वाब,उजली किरण, बन में हिरण,चांदनी रात… जैसी फीलिंग्स आने में कुछ अजीब नहीं है। लेकिन अगर किसी लड़की के लिए ये सारी फीलिंग्स किसी लड़के के नहीं बल्कि लड़की के मन में रही हों तो…? जी हां, यही इस फिल्म यानी ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ की कहानी का मूल है कि इसमें नायिका को किसी लड़के से नहीं बल्कि एक लड़की से प्यार हुआ है। अब भले ही ये ‘प्यार’ उसके परिवार, समाज और दुनिया वालों की नज़रों में गलत हो और उनकी नज़र में यह लड़की ‘बीमार’ या ‘एब्नॉर्मल’, लेकिन सच यही है कि ऐसे भी लोग इस दुनिया में हैं और यह फिल्म इन्हीं लोगों के बारे में बात करती है-बिना किसी पूर्वाग्रह के, बिना किसी फूहड़ता के। समलैंगिकता की बात करती हमारे यहां की ज़्यादातर फिल्में या तो ऑफ बीट किस्म की रहीं हैं या फिर बी-ग्रेड वाली। ऐसे में डायरेक्टर शैली चोपड़ा धर तारीफ की हकदार हो जाती हैं कि उन्होंने बतौर निर्देशक अपनी पहली ही फिल्म में न सिर्फ इस किस्म के साहसी विषय को चुना बल्कि उस पर लोकप्रिय सितारों को लेकर मुख्य धाराके सिनेमा में इस कहानी को कहने की हिम्मत दिखाई। शैली और उनकी को-राइटर गज़ल धालीवाल की तारीफ इसलिए भी ज़रूरी है कि उन्होंने इस कहानी को न तो फूहड़ होने दिया, न उपदेशात्मक और न ही उन्होंने इसमें किसी किस्म के नारी-मुक्ति के झंडे लहराए। फिल्म में हंसी-मज़ाक का फ्लेवर रख कर जहां इसे भारी होने से बचाया गया है वहीं इस नाज़ुक विषय को उन्होंने कहीं पटरी से उतरने भी नहीं दिया है। इस फिल्म की कहानी को पंजाब के एक छोटे-से शहर मोगा के एक परंपरागत पंजाबी परिवार में दिखाना भी समझदारी ही कहा जाएगा।कहानी दिल्ली-मुंबई-बंगलुरू जैसे किसी बड़े शहर में या किसी आधुनिक, आज़ाद […]

Rajasthan International Film Festival

उम्दा फिल्मों को नवाजा गया राजस्थान फिल्म समारोह में -दीपक दुआ   हाल ही में जयपुर में आयोजित किए गए पांचवें राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म समारोह (रिफ) के आखिरी दिन कई उम्दा फिल्मों, फिल्मकारों और कलाकारों को पुरस्कृत किया गया। इस बार के ‘रिफ’ की सबसे बड़ी खासियत थी पुणे स्थित राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के सौजन्य […]

Rajasthan International Film Festival-RIFF-2019

Rajasthan International Film Festival-RIFF-2019   गांधी को समर्पित होगा राजस्थान फिल्म समारोह -दीपक दुआ अपने पांचवें बरस में पहुंच चुका राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म समारोह (रिफ) इस बार महात्मा गांधी को समर्पित होगा। 19 से 23 जनवरी तक जयपुर के जी.टी. सैंट्रल मॉल स्थित आइनॉक्स में होने जा रहे इस समारोह के दौरान पुणे स्थित राष्ट्रीय […]

Aam Aadmi Biopic A Struggling Man

Aam Aadmi Biopic A Struggling Man  – S.P Chauhan    आम आदमी की बायोपिक-एस.पी. चौहान-ए स्ट्रगलिंग मैन -दीपक दुआ अभिनेताओं, नेताओं, खिलाड़ियों या इतिहास के नायकों की बायोपिक के इस दौर में एक आम इंसान की बायोपिक क्यों? अभिनेता यशपाल शर्मा कहते हैं-‘‘क्यों नहीं? अगर वो इंसान समाज का नायक हो, उसने ऐसा कुछ किया […]

Simmba Movie Review by Deepak Dua

रिव्यू-‘सिंबा’-माईंड ईच ब्लोईंग पिक्चर -दीपक दुआ…  अगर खबरों में छोटी-सी बच्ची से लेकर बूढ़ी औरतों तक से हो रहे रेप की खबरों को पढ़-सुन कर आप के मन में आता है ऐसा काम करने वालों को तो बीच बाजार में ठोक देना चाहिए या इनका ‘वो’ ही काट देना चाहिए। अगर फलते-फूलते अपराधियों और पुलिस के गठजोड़ की खबरें आपको बेचैन करती हैं और आपका मन करता है कि कोई आए और इस सारे सिस्टम को अपनी पॉवर से बदल कर रख दे तो लीजिए, रोहित शैट्टी आपके लिए ‘सिंबा’ लेकर आए हैं।सिंबा मंझे पोलीस इनिसपैक्टर संग्राम भालेराव। बोले तो-ऐसा फटाका जो बड़ा धमाका करेगा, मगर इंटरवल के बाद।     बचपन में पॉकेट मारते हुए अनाथ सिंबा ने जब देखा कि असली पॉवर तो पुलिस के पास है तो उसने पुलिस वाला बनने की ठान ली। पढ़-लिख कर इंस्पैक्टर बन भी गया लेकिन सिर्फ पैसे कमाने के लिए। मगर फिल्म का हीरो है तो भ्रष्ट होने के साथ-साथ दिल का सच्चा और भावुक मिजाज तो होगा ही।एक हादसे के बाद उसका ईमान जागा और उसने सारे बुरे लोगों की वाट लगा डाली-जाहिर है, अपने ईच इस्टाइल में।   इस कहानी में नया कुछ नहीं है। हिन्दी सिनेमा बरसों पहले ऐसी ढेरों कहानियां परोस चुका है जिनमें पुलिस वाला हीरो बुरे लोगों को खत्म करने के लिए कानून हाथ में लेता है। बेईमान से ईमानदार होते हीरो की कहानियां भी हमने बहुत देख लीं। बावजूद इन सबके यह फिल्म अच्छी लगती है, लुभाती है, बांधती है और सच कहूं तो जकड़ती भी है क्योंकि एक तो इसमें वो मनोरंजन है जो आपको सब कुछ भुला कर आनंदित होने का मौका देता है। दूसरे इसमें वे बातें भी हैं जिन्हें आप अपने समाज में होते हुए देखना चाहते हैं, लेकिन देख नहीं पाते हैं। आप चाहते हैं कि पुलिस वाले ईमानदार हों, अपराधियों से उनके गठजोड़ न हों और वे गलत काम करने वालों का न केस, न तारीख, ताबड़ तोड़ फैसला सुनाएं। लेकिन चूंकि असल में ऐसा नहीं होता है तो यह फिल्म आपको वो सब दिखा कर उद्वेलित भी करती है। स्क्रिप्ट में ‘किंतु-परंतु’ की ढेर सारी गुंजाइश, ‘फिल्मीपने’ और भरपूर ‘ड्रामा’ के बावजूद रोहित शैट्टी ये सब आपको इतनी रफ्तार से, इतने निखार से, इतनी रंगत से, इतने चुटीले संवादों, इतने धमाकेदार एक्शन, इतने मन भाते चेहरों और इतने थिरकाते गीत-संगीत के साथ परोसते हैं कि आपकी नजरें पर्दे से नहीं हटती हैं। बड़ी बात यह भी है कि यह फिल्म साफ-सुथरा सलीकेदार मनोरंजन देती है जो इन दिनों मसाला फिल्मों से लापता होता जा रहा है। और हां, यह फिल्म गैर मराठियों को […]

ZERO Movie Review by Deepak Dua

ZERO Movie Review by Deepak Dua रिव्यू-धुएं की लकीर छोड़ती ‘ज़ीरो’ -दीपक दुआ… पहले ही सीन में जब मेरठ का बउआ सिंह अखबार की एक खबर सुनाने के एवज में अपने दोस्तों पर 500 रुपए के नोटों की पूरी गड्डी लुटा देता है तो पता चल जाता है कि आप एक ‘फिल्म’ देखने आए हैं। […]

4th Khajuraho International Film Festival – 2018

4th Khajuraho International Film Festival – 2018   जन-जन से जुड़ता अनोखा फिल्मोत्सव -दीपक दुआ   देश भर में होने वाले किस्म-किस्म के फिल्म समारोहों से परे ‘खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह’ इस मायने में खास है कि यह यह खजुराहो जैसी उस जगह पर होता है जहां कोई थिएटर, कोई ऑडिटोरियम तक नहीं है और […]