Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

रिव्यू-‘दबंग 3’-न सीक्वेल, न प्रीक्वेल, बस चल-चला-चल

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

-दीपक दुआ… (Featured in IMDb Critics Reviews)

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

इस फिल्म की कहानी सलमान खान ने लिखी है। और कहानी कुछ यूं है कि…! अच्छा अब आपको ‘दबंग’ जैसे नाम वाली फिल्म में सलमान खान जैसे ‘लेखक’ की लिखी कहानी भी जाननी है? कितने भोले हैं न आप। सच तो यह है कि आप ही जैसे लोगों के दम पर तो हिन्दी फिल्में कमा-खा रही हैं। वरना कायदे की फिल्में धरी न रह जातीं और दबंगई दिखाने वाली फिल्में एक दिन में करोड़ों न बटोर ले जातीं।

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

इस बार चुलबुल पांडेय टुंडला शहर के पापड़गंज थाने में तैनात हैं। जैसा कॉमिक्स-नुमा इस थाने का नाम है, वैसे ही सारे किरदार और उनकी हरकतें हैं इस फिल्म में। बेवजह ठूंसे गए इन किरदारों और उनकी इन बेसिर-पैर की हरकतों से ही तो रंगत आती है इस किस्म की फिल्मों में। इस बार चुलबुल पांडेय की ज़िंदगी में बहुत पीछे तक गई है कहानी। जब चुलबुल असल में धाकड़ चंद पांडेय था। जब उसकी ज़िंदगी में खुशी नाम की लड़की आई थी और उसी की वजह से उसकी भिड़ंत बाली सिंह से हुई थी। यानी चाहें तो आप इस फिल्म को ‘दबंग’ का सीक्वेल भी कह सकते हैं और चाहें तो प्रीक्वेल भी। लेकिन सच तो यह है कि ऐसी फिल्मों के न सीक्वेल होते हैं, न प्रीक्वेल। बस चल-चला-चल होते हैं। जब तक आप चला रहे हैं, ये चल रहे हैं।

Dabangg 3 Movie Review by Deepak Dua

कहानी ‘भाई’ की है लेकिन स्क्रिप्ट पर तीन लोगों ने हाथ आजमाया है। तो, जैसी इसकी कहानी है, यूं समझ लीजिए कि स्क्रिप्ट भी वैसी ही है। कहीं से कुछ भी शुरू हो जाता है और चुलबुल पांडेय आकर सब सही कर देता है। दहलाने के लिए वही ज़बर्दस्ती की मारधाड़, हंसाने के लिए वही बेसिर-पैर की फूहड़ बातें और दिखाने के लिए वही पिलपिला रोमांस। रही संवादों की बात तो उन्हें भी दो लोगों ने बड़ी ‘मेहनत’ से लिखा है। ‘चमचे हो, अब यह बताओ कि टी-स्पून हो या टेबल-स्पून’ जैसे संवाद इस किस्म की फिल्मों को भरपूर शोभा देते हैं।

सलमान खान इस किरदार में जैसी एक्टिंग करते आए हैं, वैसी ही इस बार भी की है। सोनाक्षी भी वैसी ही रहीं। नई लड़की सई मांजरेकर को कुछ कायदे के सीन मिलते तो वह बेचारी अच्छे से परखी जाती। हालांकि वह प्यारी लगती हैं लेकिन सलमान से बहुत छोटी भी। विलेन बने सुदीप ‘मक्खी’ फिल्म वाले किरदार से ऊपर नहीं उठ पाए। विनोद खन्ना अब रहे नहीं तो उनके भाई प्रमोद खन्ना आ गए। वह बुरे नहीं लगे लेकिन डिंपल कपाड़िया सचमुच बहुत पकाऊ लगीं। कैमरा बहुत हिला और बैकग्राउंड म्यूज़िक ने सिर हिला दिया। हां, एक ‘यूं कर के…’ वाले गाने को छोड़ कर बाकी के गाने अच्छे लगते हैं। सुनने में भी और देखने में भी। प्रभुदेवा के निर्देशन में कोई नयापन नहीं है। ‘भाई’ ने कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी होगी।

फिल्म वाले अक्सर कहते हैं न कि दिमाग घर छोड़ कर आना। ये दरअसल आपको ‘दबंग’ जैसी फिल्मों के लिए तैयार कर रहे होते हैं। ऐसी फिल्में जो अंदर से खोखली होती हैं लेकिन आपकी जेबें खाली करवा ले जाती हैं। यह फिल्म भी लूटने आई है। तो ज़रा बच के। वैसे यह फिल्म सलमान के प्रशंसकों या भक्तों के लिए नहीं उनके ‘अंधभक्तों’ के लिए है। ‘अंधभक्त’ तो समझते हैं न आप? वही, जिन्हें बरगला कर जहां चाहे बहकाया-भटकाया जा सकता है। और ऐसे लोगों की गिनती अपने यहां कम थोड़े ही है।

 तो जाइए, बहकिए, भटकिए, देखिए ये फिल्म और तैयार रहिए ‘दबंग 4’ के लिए।(रेटिंग की ज़रूरत ही क्या है? रिव्यू पढ़िए और फैसला कीजिए कि फिल्म कितनी अच्छी या खराब है। और हां, इस रिव्यू पर अपने विचार ज़रूर बताएं।)

Dabangg 3: Official Trailer | Salman Khan | Sonakshi Sinha | Prabhu Deva

[author title=”दीपक दुआ- फिल्म समीक्षक” image=”https://1.bp.blogspot.com/-wMOA61LF_gQ/WofjufmXCYI/AAAAAAAAJik/1yD-5ujh1Lw-LDjWOBRsh9Zn2pGhC9kRACLcBGAs/s1600/Deepak%2BDua%2BFilm%2BCritic%2B333.jpg”](दीपक दुआ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज से घुमक्कड़। अपनी वेबसाइट ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)[/author]

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