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Kadvi Hawa (Dark Wind) Movie Review

Kadvi Hawa (Dark Wind) Movie Review   रिव्यू-कड़वी है मगर जरूरी है -दीपक दुआ…  ‘कड़वी हवा’ का एक सीन देखिए। क्लास के सब बच्चे एक लड़के की शिकायत करते हुए कहते हैं कि मास्टर जी, यह कह रहा है कि साल में सिर्फ दो ही मौसम होते हैं-गर्मी और सर्दी। मास्टर जी पूछते हैं-बरसात का मौसम कहां गया? जवाब मिलता है- ‘मास्साब, बरसात तो साल में बस दो-चार दिन ही पड़त…!’ यह सुन कर सब बच्चे हंस पड़ते हैं। इधर थिएटर में भी हल्की-सी हंसी की आवाजें फैलती हैं। लेकिन इस हल्के-फुल्के सीन में कितना बड़ा और कड़वा सच छुपा है उसे आप और हम मानते भले नहों, अच्छे से जानते जरूर हैं। बचपन में स्वेटर पहन कर रामलीला देखने वाली हमारी पीढ़ी आज दीवाली के दिन कोल्ड-ड्रिंक  पीते हुए जब कहती है कि अब पहले जैसा मौसम नहीं रहा, तो यह उस सच्चाई का ही बखान होता है जिसे जानते तो हम सब हैं, लेकिन उसके असर को मानने को राजी नहीं होते। नीला माधव पांडा की यह फिल्म हमें उसी सच से रूबरू करवाती है-कुछ कड़वाहट के साथ। कहानी बीहड़ के एक ऐसे अंदरूनी गांव की है जहां मौसम की मार के चलते हर किसान पर कर्ज है जिसे वापस करने की कोई सूरत न देख किसान एक-एक कर खुदकुशी कर रहे हैं।बैंक के कर्ज की वसूली करने वाले गुनु बाबू को लोग यमदूत कहते हैं क्योंकि वह जिस गांव में जाता है वहां दो-चार लोग तो मौत को गले लगा ही लेते हैं। गुनु बाबू के लिए उसके ‘क्लाइंट’ चूहे हैं। ऐसे में एक अंधा बूढ़ा अपने बेटे के लिए गुनु बाबू से एक अनोखा सौदा कर लेता है। पर क्या कड़वी हवा किसी को यूं ही छोड़ देती है? इस किस्म की फिल्मों के साथ अक्सर यह दिक्कत आती है कि ये या तो अति नाटकीय हो जाती हैं या फिर उपदेश पिलाने लगती हैं। और कुछ नहीं तो हार्ड-हिटिंग बनाने के चक्कर में इनमें दिल दहलाने वाली घटनाएं डालना तो आम बात है। लेकिन इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है। सौ मिनट की होने के बावजूद यह मंथर गति से चलती है, मानो इसे अपनी …

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Nila Madhab Panda’s Upcoming Movie “Kadvi Hawa”

Director Of Award Winning Movies “I Am Kalam” And “Jalpari” -Nila Madhab Panda’s Upcoming Movie “Kadvi Hawa    आंखें खोलेगी ‘कड़वी हवा’-नीला माधव पांडा -दीपक दुआ…    नीला माधव पांडा से अपनी दोस्ती उतनी ही पुरानी है जितनी कि उनकी पहली फिल्म ‘आई एम कलाम’। इस फिल्म से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति और बेशुमार पुरस्कार पानेवाले नीला ने इसके बाद कन्या भ्रूण हत्या के साथ पानी बचाने का संदेश देती ‘जलपरी’,एच.आई.वी. और एड्स की बात करती ‘बबलू हैप्पी है’ और पानी की कमी, जाति प्रथा व आॅनर किलिंग पर ‘कौन कितने पानी में’ बनाईं। अब वह जो ‘कड़वी हवा’ लेकर आ रहे हैं उसे जलवायु परिवर्तन पर बनी पहली हिन्दी फिल्म कहा जा रहा है। पिछले साल भारत सरकार से पद्मश्री सम्मान पा चुके नीला माधव पांडा मुझ से हुई इस बातचीत में सारी बातें विस्तार से बता रहे हैं।   कैसे हुई शुरूआत मैं जिस इलाके से आता हूं वहां बाढ़ देखना, तूफान झेलना जैसी बातें आम थीं। हम लोग इस तरह की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। हमें लगता है कि यह तो होता रहता है, इसमें हम क्या कर सकते हैं। लेकिन जब दो साल में एक बार आने वाली बाढ़ एक साल में दो बार आने लगे या चार-पांच साल में पड़ने वाला सूखा हर साल पड़ने लगे तो समझ लेना चाहिए कि कुछ गड़बड़ है। अब देखिए न कि हम लोग दिल्ली में प्रदूषित हवा की बात सालों से करते आए हैं लेकिन प्रदूषण के कारण हर साल कुछ दिन तक पूरा शहर हवा में ही डूब जाए तो यह गड़बड़ है। तो बस, इसी से आइडिया आया और हमारी कहानी का जन्म हुआ।  किरदारों के जरिए बात मैंने इस फिल्म को लेकर किसी तरह का …

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IS PADMAVATI AT REAL RISK?

IS PADMAVATI AT REAL RISK?  Sanjay Leela Bhansali’s Padmavati, which is currently messed up in a major controversy, was submitted to Central Board of Film Certification (CBFC) last week but because it was not ‘completed’, the board sent the film back. Because of many disturbing and big protests against Sanjay …

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