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Aamir and Priyanka are favourites of Miss World Manushi Chhillar

Aamir Khan and Priyanka Chopra are favourites of Miss World Manushi Chhillar 🇮🇳 🏆 मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर कल मुंबई  में प्रेस कान्फ्रेंस  किया और बताया अभिनेता आमिर खान की फिल्म में काम करना पसंद करेंगी. छिल्लर ने कहा कि सुपरस्टार आमिर खान सामाजिक-प्रासंगिक फिल्में बनाने के लिए जाने जाते …

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Most Challenging Moments Miss World 2017 Manushi Chillar

Most Challenging Moments Miss World 2017 Manushi Chillar ‎* 👑Miss World 2017 •  India – Manushi Chhillar * 1st Runner-Up •  Mexico – Andrea Meza Miss World 2017 was the 67th edition of the Miss World pageant. was held on 18 November 2017 at the Sanya City Arena in Sanya, China. 118 contestants from all over the world competed …

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Kadvi Hawa (Dark Wind) Movie Review

Kadvi Hawa (Dark Wind) Movie Review   रिव्यू-कड़वी है मगर जरूरी है -दीपक दुआ…  ‘कड़वी हवा’ का एक सीन देखिए। क्लास के सब बच्चे एक लड़के की शिकायत करते हुए कहते हैं कि मास्टर जी, यह कह रहा है कि साल में सिर्फ दो ही मौसम होते हैं-गर्मी और सर्दी। मास्टर जी पूछते हैं-बरसात का मौसम कहां गया? जवाब मिलता है- ‘मास्साब, बरसात तो साल में बस दो-चार दिन ही पड़त…!’ यह सुन कर सब बच्चे हंस पड़ते हैं। इधर थिएटर में भी हल्की-सी हंसी की आवाजें फैलती हैं। लेकिन इस हल्के-फुल्के सीन में कितना बड़ा और कड़वा सच छुपा है उसे आप और हम मानते भले नहों, अच्छे से जानते जरूर हैं। बचपन में स्वेटर पहन कर रामलीला देखने वाली हमारी पीढ़ी आज दीवाली के दिन कोल्ड-ड्रिंक  पीते हुए जब कहती है कि अब पहले जैसा मौसम नहीं रहा, तो यह उस सच्चाई का ही बखान होता है जिसे जानते तो हम सब हैं, लेकिन उसके असर को मानने को राजी नहीं होते। नीला माधव पांडा की यह फिल्म हमें उसी सच से रूबरू करवाती है-कुछ कड़वाहट के साथ। कहानी बीहड़ के एक ऐसे अंदरूनी गांव की है जहां मौसम की मार के चलते हर किसान पर कर्ज है जिसे वापस करने की कोई सूरत न देख किसान एक-एक कर खुदकुशी कर रहे हैं।बैंक के कर्ज की वसूली करने वाले गुनु बाबू को लोग यमदूत कहते हैं क्योंकि वह जिस गांव में जाता है वहां दो-चार लोग तो मौत को गले लगा ही लेते हैं। गुनु बाबू के लिए उसके ‘क्लाइंट’ चूहे हैं। ऐसे में एक अंधा बूढ़ा अपने बेटे के लिए गुनु बाबू से एक अनोखा सौदा कर लेता है। पर क्या कड़वी हवा किसी को यूं ही छोड़ देती है? इस किस्म की फिल्मों के साथ अक्सर यह दिक्कत आती है कि ये या तो अति नाटकीय हो जाती हैं या फिर उपदेश पिलाने लगती हैं। और कुछ नहीं तो हार्ड-हिटिंग बनाने के चक्कर में इनमें दिल दहलाने वाली घटनाएं डालना तो आम बात है। लेकिन इस फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है। सौ मिनट की होने के बावजूद यह मंथर गति से चलती है, मानो इसे अपनी …

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