Tag: दीपक दुआ

Rajasthan International Film Festival

उम्दा फिल्मों को नवाजा गया राजस्थान फिल्म समारोह में -दीपक दुआ   हाल ही में जयपुर में आयोजित किए गए पांचवें राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म समारोह (रिफ) के आखिरी दिन कई उम्दा फिल्मों, फिल्मकारों और कलाकारों को पुरस्कृत किया गया। इस बार के ‘रिफ’ की सबसे बड़ी खासियत थी पुणे स्थित राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार के सौजन्य […]

पुरुष भी टूट कर प्यार कर सकता है

पुरुष भी टूट कर प्यार कर सकता है -दीपक दुआ   दिल्ली में जन्मे मगर दुबई और न्यूजीलैंड में पले-बढ़े मोहित मदान को एक्टिंग का शौक मुंबई खींच लाया। बचपन से ही अपने भीतर हिन्दी फिल्मों का नशा महसूस कर चुके मोहित यहां काफी सारे विज्ञापनों के अलावा राज शैट्टी की फिल्म ‘लव एक्सचेंज’ और […]

सूरजकुंड मेले में संस्कृतियों का संगम

सूरजकुंड मेले में संस्कृतियों का संगम -दीपक दुआ दिल्ली से सटे फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके में 1987 में शुरू किया गया सूरजकुंड मेला आज पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान पा चुका है। अब ‘सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट्स मेला’ के नाम से मशहूर यह मेला अब विश्व का सबसे बड़ा क्राफ्ट मेला बन चुका है। […]

दंगल की समीक्षा अब स्कूली किताब में

‘दंगल’ की समीक्षा अब स्कूली किताब में आमिर खान वाली फिल्म ‘दंगल’ के बारे में देश भर में समीक्षकों-आलोचकों ने अलग-अलग तरह से लिखा। लेकिन इन्हीं में से एक समीक्षा ऐसी भी निकली जो अब स्कूली किताबों में एक पाठ की तरह पढ़ाई जा रही है। दिल्ली स्थित फिल्म समीक्षक दीपक दुआ की लिखी इस […]

Nila Madhab Panda’s Upcoming Movie “Kadvi Hawa”

Director Of Award Winning Movies “I Am Kalam” And “Jalpari” -Nila Madhab Panda’s Upcoming Movie “Kadvi Hawa    आंखें खोलेगी ‘कड़वी हवा’-नीला माधव पांडा -दीपक दुआ…    नीला माधव पांडा से अपनी दोस्ती उतनी ही पुरानी है जितनी कि उनकी पहली फिल्म ‘आई एम कलाम’। इस फिल्म से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति और बेशुमार पुरस्कार पानेवाले नीला ने इसके बाद कन्या भ्रूण हत्या के साथ पानी बचाने का संदेश देती ‘जलपरी’,एच.आई.वी. और एड्स की बात करती ‘बबलू हैप्पी है’ और पानी की कमी, जाति प्रथा व आॅनर किलिंग पर ‘कौन कितने पानी में’ बनाईं। अब वह जो ‘कड़वी हवा’ लेकर आ रहे हैं उसे जलवायु परिवर्तन पर बनी पहली हिन्दी फिल्म कहा जा रहा है। पिछले साल भारत सरकार से पद्मश्री सम्मान पा चुके नीला माधव पांडा मुझ से हुई इस बातचीत में सारी बातें विस्तार से बता रहे हैं।   कैसे हुई शुरूआत मैं जिस इलाके से आता हूं वहां बाढ़ देखना, तूफान झेलना जैसी बातें आम थीं। हम लोग इस तरह की बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। हमें लगता है कि यह तो होता रहता है, इसमें हम क्या कर सकते हैं। लेकिन जब दो साल में एक बार आने वाली बाढ़ एक साल में दो बार आने लगे या चार-पांच साल में पड़ने वाला सूखा हर साल पड़ने लगे तो समझ लेना चाहिए कि कुछ गड़बड़ है। अब देखिए न कि हम लोग दिल्ली में प्रदूषित हवा की बात सालों से करते आए हैं लेकिन प्रदूषण के कारण हर साल कुछ दिन तक पूरा शहर हवा में ही डूब जाए तो यह गड़बड़ है। तो बस, इसी से आइडिया आया और हमारी कहानी का जन्म हुआ।  किरदारों के जरिए बात मैंने इस फिल्म को लेकर किसी तरह का कोई रिसर्च वर्क नहीं किया और न ही मेरे पास करोड़ों रुपए थे कि मैं हॉलीवुड की डिसास्टर वाली फिल्मों की तरह तूफान या बाढ़ दिखाता। तो मैंने तय किया कि इस […]

दिवाली की बाज़ी किसके हाथ…!

दिवाली की बाज़ी किसके हाथ…! -दीपक दुआ…  दिवाली वाला हफ्ता हो और बड़ी फिल्में आकर एक-दूजे को चुनौती न दें तो कुछ सूना-सूना, सूखा-सूखा सा लगने लगता है। हर साल दिवाली के मौके पर दो-तीन बड़ी फिल्में एक-दूसरे को टक्कर देती हैं।इस साल रोहित शैट्टी की ‘गोलमाल अगेन’ और आमिर खान के बैनर से आ रही ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ दिवाली पर आमने-सामने होंगी।   दिवाली यानी ‘हॉट-स्पॉट’           साल भर में ईद, दिवाली, क्रिसमस, 15 अगस्त जैसे चंद ही मौके होते हैं जब एक साथ दो-तीन बड़ी फिल्में आकर एक-दूसरे को टक्कर देने का दम रखती हैं। दरअसल दिवाली का मौका ऐसा होता है जब हर कोई सेलिब्रेशन के मूड में होता है और लगभग हर किसी के पास मौज-मजे पर खर्च ने के लिए पैसा भी होता है। यही कारण है कि अक्सर दीवाली पर आनेवाली कोई कमजोर फिल्म भी अपनी हैसियत से ज्यादा कमाई कर जाती है।   ‘गोलमाल’ करेगी धमाल?   रोहित शैट्टी के डायरेक्शन में आने वाली ‘गोलमाल’ सीरिज की फिल्मों ने हर बार बॉक्स-ऑफिस पर अपना लोहा मनवाया है। इस सीरिज की पहली फिल्म ‘गोलमाल-फन अनलिमिटेड’ जुलाई  2006 में आई थी। करीब 11 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने लगभग 70 करोड़ का बिजनेस किया था। फिर 2008 में दिवाली पर आई ‘गोलमाल रिट्न्र्स’ ने अपनी 24 करोड़ की लागत के मुकाबले लगभग 108 करोड़ की कलैक्शन की थी। इस सीरिज की तीसरी फिल्म ‘गोलमाल 3’ भी 2010 में दीवाली के मौके पर आई थी। लगभग 40 करोड़ में बनी इस फिल्म ने 160 करोड़ का कारोबार किया था। यह फिल्म हालांकि पहले की दोनों फिल्मों के मुकाबले हल्की थी लेकिन इसकी कामयाबी के बाद यह तय-सा हो गया था कि रोहित इस श्रृंखला की अगली फिल्में अब दिवाली पर ही लाया करेंगे। और अब रोहित ‘गोलमाल अगेन’ ला रहे हैं जिसकी लागत तकरीबन 70 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस फिल्म का ट्रेलर बताता है कि इस बार काॅमेडी में हाॅरर का टच भी दिया गया है। हालांकि इस ट्रेलर से दर्शक काफी निराश दिख रहेहैं और फिल्मी पंडितों का भी कहना है कि यह फिल्म ज्यादा बड़ा धमाका नहीं कर पाएगी।लेकिन दिवाली का मौका हो और सामने बिना दिमाग लगाए हल्का-फुल्का मनोरंजन मिलजाए तो आमतौर पर वह सफलता पा ही लेता है। बहुत जल्द पता चल जाएगा कि यह ‘गोलमाल’ कितना बड़ा धमाल करेगी।   ‘सीक्रेट’ बनेगी सुपरस्टार आमिर खान के बैनर से कोई फिल्म आ रही हो तो उसका चर्चा में आना और छा जाना स्वाभाविक-सा हो जाता है। हालांकि इस फिल्म में खुद आमिर भी हैं और एक बहुत ही अलग व फनी किस्म के रोल में हैं लेकिन यह भी सच है कि वह इस फिल्म में ज्यादा नजर नहीं आएंगे। दरअसल यह एक ऐसी मुस्लिम लड़की की कहानी है जो संगीत की दुनिया में छा जाना चाहती है लेकिन उसके अब्बू […]

मिल गया टिकट टू बॉलीवुड

मिल गया टिकट टू बॉलीवुड- क्या कोई फैशन शो फैशन, ज्वेलरी, मेकअप, हेयर स्टाइल, वेडिंग प्लानिंग, लाइफस्टाइल आदि से जुड़े लोगों को बॉलीवुड का टिकट दिला सकता है? जी हां, हाल ही में मुंबई में हुए एक अनोखे और रंगारंग अवार्ड शो ‘पेज 3 फैशन और लाइफस्टाइल अवार्ड्स (पी3एफएलए) में ऐसी कई प्रतिभाओं को फिल्मी […]

रिव्यू-‘लखनऊ सैंट्रल’ से दूरी ही भली

रिव्यू-‘लखनऊ सैंट्रल’ से दूरी ही भली -दीपक दुआ…   कुछ अनगढ़ लोगों ने एक टोली बनाई।दुनिया के सामने नाचे-गाए मगर उनका असल मकसद कुछ और था। याद कीजिए, यही थी न फराह खान की शाहरुख खान वाली फिल्म ‘हैप्पी न्यू ईयर’ की कहानी ? कुछ साल पहले लखनऊ जेल में कुछ कैदियों का एक म्यूजिकल बैंड बना था जिसकी ख्याति इतनी फैली कि जेल वालों ने उन्हें कभी-कभार बाहर जाकर परफॉर्म करने की इजाजत भी दे डाली। अब सिर्फ इस बैंड की कहानी पर फिल्म बनती तो शायद सूखी रहजाती। सो, इसमें जेल से भागने का तड़का लगा कर बनी है ‘लखनऊ सैंट्रल’। नायक के बिना किसी कसूर के जेल में पहुंचने, एक एन.जी.ओ. वाली मैडम जी की मदद से वहां बैंड बनाने,भागने के लिए साथी चुनने और फिर वहां से भागने की योजना को अंजाम देने की इस कहानी में क्या कुछ नहीं हो सकता था? कायदे से डाले जाते तो आंसू निकालने वाले इमोशंस, मुट्ठियां बंधवाने वाले सीन, हिला देने वाले संवाद और भी न जाने क्या-क्या…!  लेकिन फिल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है। इस तरह की फिल्में बनाने के लिए हमारे फिल्म वालों को 1981 में आई अंग्रेजी फिल्म ‘एस्केप टू विक्टरी’ जरूर देखनी चाहिए। जवान लड़का जेल में 18 महीने बाद भी कसरती बदन लिए चुपचाप सब बर्दाश्त करता रहता है। बैंड बनाता है तो लल्लुओं को लेकर। चंद दिनों में उन्हें ट्रेंड भी कर देता है। मगरपरफॉरर्मेंस से ठीक पहले उन्हें पेरोल पर छुड़वा देता है। भागना चाहता है ताकि बाहर जाकरबैंड बना सके। अरे भैये, लोग पहचानेंगे नहीं क्या तेरे को…? ढेरों ऊल-जलूल और बेतुकी बातों के बीच राहत देने का काम सिर्फ और सिर्फ कलाकारों की एक्टिंग ने की है। फरहान खुद तो कमजोर लगे लेकिन दीपक डोबरियाल, राजेश शर्मा,गिप्पी ग्रेवाल, इनामुल हक, रोनित राय, वीरेंद्र सक्सेना, रवि किशन आदि को देखना आनंद देता है। डायना पेंटी भी बेहद साधारण रहीं। रंजीत तिवारी कायदे की स्क्रिप्ट ही खड़ी नहीं कर पाए तो निर्देशन कहां से बढ़िया देते। गाने भी बस दो ही जंचे। एक हद के बाद यह फिल्म देखना जेल में कैद होने जैसा लगने लगता है। जबरन ठूंसी गईकहानी देखने से तो बेहतर है कि इससे दूर ही रहा जाए।          अपनी रेटिंग-डेढ़ स्टार                           […]